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हिमाचल: हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना में देरी, चंबा के शिक्षा अधिकारियों से जवाब तलब

हाईकोर्ट के आदेशों पर समय पर कार्रवाई न होने को लेकर शिक्षा निदेशालय ने मांगा स्पष्टीकरण
रोशन लाल, गणेश दत्त और उत्तम चंद से जुड़े मौद्रिक लाभ के मामलों का उल्लेख
25 सितंबर को सुबह 10 बजे शिक्षा निदेशक कार्यालय में व्यक्तिगत पेशी, लिखित जवाब भी देना होगा


चंबा। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना में कथित देरी के मामले में शिक्षा निदेशालय ने चंबा के संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। निदेशालय की ओर से जारी नोटिस में अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी को लेकर अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने के साथ निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। मामला तीन अलग-अलग न्यायिक प्रकरणों से जुड़ा है, जिनमें याचिकाकर्ताओं को मौद्रिक लाभ जारी करने से संबंधित हाईकोर्ट के निर्देशों की अनुपालना की जानी थी। निदेशालय ने नोटिस में समय पर प्रक्रिया पूरी न होने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

तीन मामलों से जुड़ा है पूरा प्रकरण

शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी नोटिस में रोशन लाल, प्रवक्ता, गणेश दत्त (शास्त्री) और उत्तम चंद, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक से जुड़े हाईकोर्ट के मामलों का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में अदालत की ओर से याचिकाकर्ताओं को संबंधित मौद्रिक लाभ उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए थे।

निदेशालय के अनुसार फरवरी 2025 में ही चंबा के उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा को हाईकोर्ट के आदेशों को तत्काल लागू करने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद संबंधित प्रधानाचार्यों को भी आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद आदेशों की अनुपालना की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकी।

नोटिस के मुताबिक संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने थे, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा मामला शिक्षा निदेशालय तक समय पर नहीं पहुंचा।

बजट की मांग भेजी गई, लेकिन निदेशालय तक नहीं पहुंचा मामला

नोटिस में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना के लिए संबंधित प्रधानाचार्यों ने चंबा के उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा के समक्ष बजट की मांग प्रस्तुत की थी। इसका उद्देश्य अदालत के आदेश के अनुसार संबंधित कर्मचारियों को देय मौद्रिक लाभ जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।

हालांकि, निदेशालय के अनुसार निर्धारित समय के भीतर संबंधित मामला या बजट की मांग शिक्षा निदेशालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। इसी देरी को लेकर अब संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।

शिक्षा निदेशालय ने नोटिस में इस स्थिति को हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना में कमी और उच्च अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों का समय पर पालन नहीं किए जाने से जोड़कर गंभीरता से लिया है।

अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा

निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्ट रूप से पूछा है कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना में देरी क्यों हुई। अधिकारियों को अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के साथ व्यक्तिगत रूप से भी उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

नोटिस में देरी को गंभीरता से लिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, फिलहाल संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसलिए इसे अधिकारियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई या किसी प्रकार का दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। उनका पक्ष सामने आने और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

25 सितंबर को सुबह 10 बजे पेशी

शिक्षा निदेशालय के नोटिस के अनुसार संबंधित अधिकारी अथवा अधिकारीगण को 25 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे शिक्षा निदेशक के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अधिकारियों को इस दौरान अपना लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत करना होगा।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित अधिकारी निर्धारित समय पर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो उपलब्ध प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस में यह संकेत दिया गया है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों के पास अपने बचाव में कुछ नहीं कहने की स्थिति मानी जा सकती है और नियमों के तहत प्रशासनिक विभाग को आगे की कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

चंबा के अधिकारियों की भूमिका पर नजर

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन को लेकर विभागीय स्तर पर हुई प्रक्रिया की पड़ताल हो रही है। अदालत के आदेश के बाद विभाग के स्तर पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद बजट की मांग भी प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई, लेकिन मामला समय पर निदेशालय तक नहीं पहुंच पाया।

अब शिक्षा निदेशालय यह जानना चाहता है कि आदेशों की अनुपालना में देरी किन परिस्थितियों में हुई और संबंधित प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी क्यों नहीं की जा सकी।

25 सितंबर की पेशी के बाद स्पष्ट होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल शिक्षा निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। 25 सितंबर को होने वाली व्यक्तिगत पेशी और लिखित स्पष्टीकरण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

नोटिस की एक प्रति चंबा के माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक को भी भेजी गई है, ताकि संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा सके और निर्धारित तारीख एवं समय पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके। दस्तावेज पर शिक्षा निदेशालय की 24 सितंबर 2026 की मुहर भी दर्ज है।

इस मामले में अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और विभागीय रिकॉर्ड की जांच पर नजर रहेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना में देरी के लिए विभागीय स्तर पर क्या कारण सामने आते हैं और आगे कौन-सी प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।